Monday, November 23, 2015
दायर-इ-इश्क़ में अपना मकाम पैदा कर
नया ज़माना, नए सुबह-ओ-शाम पैदा कर
खुदा अगर दिल-इ-फ़ितरत शनास दे तुझको
सकूत -इ-लाला -ओ-गुल से कलाम पैदा कर
मेरा तारीक़ अमीरी नहीं, फ़कीरी है
ख़ुदा न बेंच , गरीबी में नाम पैदा कर
-इक़बाल
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